** मेरे प्यारे भाइयों और बहनों आप कैसे हो जी ? **
**नोट = जरूरी इन बातो को आप स्वीकार कर लेवे।**
★(1). बाप(परमात्मा) जब आते हैं तो आकर समझाते हैं - मैं आता ही तब हूँ, जब सारी दुनिया पतित है। पतित दुनिया में एक भी पावन नहीं है। समझते हैं गंगा पतित-पावनी है इसलिए जाते हैं स्नान करने। परन्तु पानी से तो कोई पावन हो नहीं सकता। पुरानी दुनिया(द्वापर, कलियुग) है ही पतित, नई दुनिया(सतयुग,त्रेता) है पावन। पतितों को पावन बनाना - यह तो बाप का ही काम है। बाकी वह पानी की नदी तो सब जगह है। बादलों से पानी बरसता है, सबको मिलता है। अगर पानी की नदी पावन बनाये, फिर तो सबको पावन कर दे। पावन बनने की युक्ति बाप ही आकर बताते हैं इन द्वारा। इनकी अपनी आत्मा है। बाप कहते हैं - मुझे अपना शरीर नहीं है। कल्प-कल्प इसमें(प्रजापिता ब्रह्मा) ही आता हूँ तुमको समझाने। तुम अपने जन्मों को नहीं जानते हो। कल्प की आयु लाखों वर्ष कह देते हैं।
**बाप कहते हैं - यह 84 जन्मों का चक्र है। 5 हजार वर्ष में 84 लाख जन्म कोई ले न सके। तो बाप समझाते हैं - स्वर्ग में तुम 16 कला सम्पूर्ण थे फिर 2 कला कम हुई फिर धीरे-धीरे कला कम होती जाती है।
★(2). द्वापर कलियुग को पतित दुनिया कहा जाता है। यह बातें कोई शास्त्रों में नहीं हैं। मुझे ही ज्ञान का सागर कहते हैं। मैं(परमात्मा) कोई शास्त्र पढ़ता हूँ क्या? मैं इस सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त को जानता हूँ। भक्ति मार्ग वालों को यह ज्ञान हो नहीं सकता। वह सब है भक्ति का ज्ञान। गाते भी हैं, हम पापी, नींच हैं। हमारे में कोई गुण नाहीं। आपेही तरस परोई... इनके ऊपर तरस किया गया है तब मनुष्य से देवता बने हैं, इनको कहा जाता है ऊंच ते ऊंच तकदीर। स्कूल में तकदीर बनाने जाते हैं। तो आप मनुष्य से देवता बनने के स्कुल का टिकट लेना चाहते है तो आज संपर्क करे = प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय या पीस आफ मांइड चैनल(pmtv) देखिए ।
★(3). स्वर्गवासी(परमात्मा) तो बाप ही बनायेंगे। स्वर्ग कहा ही जाता है सतयुग को। यह जो कहते हैं फलाना स्वर्गवासी हुआ, यह झूठ बोलते हैं। यह तो नर्क है। कोई मरा तो कहते स्वर्ग में गया फिर नर्क में क्यों बुलाते हैं कि आकर खाना खाओ। स्वर्ग में तो उनको बहुत वैभव मिलते हैं फिर तुम नर्क में क्यों बुलाते हो? मनुष्यों में इतनी भी समझ नहीं है।
★(4). बाप(परमात्मा) कहते हैं - मैं स्वर्गवासी नहीं बनता हूँ। मैं तो परमधाम में रहता हूँ। नर्कवासी-स्वर्गवासी तुम बनते हो। आत्मा का निवास स्थान शान्तिधाम है फिर तुम सुखधाम में आते हो। यह है ही दु:खधाम, इनका अब विनाश होना है। यह किसको भी पता नहीं है कि भगवान ब्रह्मा तन में आकर राजयोग सिखाते हैं। वह समझते हैं कि कृष्ण आया, कृष्ण के तन में भी नहीं कहते। कृष्ण को भगवान कह न सकें। वह तो विश्व का मालिक है। लिब्रेटर सबका एक है, वह है सुप्रीम आत्मा, परम-आत्मा। दुनिया में कोई भी सतसंग नहीं होता, जहाँ ऐसा समझें कि हम बाप से स्वर्ग का वर्सा लेते हैं। पतित से पावन बनाने वाला तो एक ही बाप(परमात्मा) है। बाप कहते हैं - मैं तुम्हारा सच्चा गुरू हूँ, तुमको पावन बनाता हूँ। बाकी गंगा का पानी पावन बना नहीं सकता। यह है ही पापात्माओं की दुनिया। कुछ भी करें सीढ़ी नीचे उतरनी ही है। सतोप्रधान(देवी-देवता) से तमोप्रधान(मनुष्य) बनना ही है।
★(5). बाप(परमात्मा) कहते हैं - यह तुम्हारा अन्तिम जन्म है। अभी वर्सा(जायदाद-सतयुग,त्रेता की ) लिया सो लिया, फिर कभी नहीं पा सकेंगे।
**मेरे अति प्यारे भाइयो और बहनों आपने अपना किमती समय निकालकर इस पोस्ट को पढ़ा इसके लिए धन्यवाद।
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